Tuesday, December 22, 2020

आदमी क्यों सुनता नहीं औरत क्यों समझती नहीं Why man is DEAF and women is DUMB

आदमी क्यों सुनता नहीं औरत क्यों समझती नहीं!
Why man is DEAF and women is DUMB! 

जेम्स ब्राउन ने १९६६ में कहा था 
This is a man's world
This is a man's world
But it wouldn't be nothing
Nothing without a woman or a girl



निस्चय ही यह पुरुष प्रधान दुनिया है और हो भी क्यों न  क्यूंकि पुरुष तर्की और महिला कुतर्की , पुरुष उस बात पर सम्भवतः आसानी से विसवास कर लेता है जो बात तथ्यों पर आधारित होती है और महिलाएं तथ्यों और आंकड़ों में नहीं फसना चाहती

१। एक लड़की को टेडी बियर दीजिये वह उससे संभाल कर रखेगी उसकी केयर करेगी और इसके विपरीत एक लड़के को टेडी बियर दीजिये वह सोचेगा की ये इतना मोटा क्यों है इसके पेट में क्या भरा है और वह उससे तोड़ेगा पटकेगा फाड़ डालेगा जब तक जान नहीं लेगा उसके अंदर क्या है 

२। हमेशा पुरुष ही महिला से कहता है की वह उसके लिए चाँद को जमीन पर ला सकता है या चांद तारे तोड़ सकता है और वह खुश हो जाती है महिला क्यों नहीं कहती 
कयूंकि अगर महिला कहेगी तोह पुरुष का अगला प्रशन होगा कैसे तोड़कर लाओगी चाँद या तारे वहां तक जाओगी कैसे 

माहिला पुरुष में समानता 

माहिला पुरुष किसी भी रूप से सामान नहीं है और न ही हो सकते हैं दोनों की सोच और नजरिया अलग है एसा मेरा मानना है 

@ जब पुरुष पर किसी चीज का प्रेशर आता है तोह वह शराब पीता है या सबसे अलग हो जाता है वहीँ जब महिला पर प्रेशर आता है  तो वो चॉकलेट खाती है और शॉपिंग करती है 

@ हम ये सुनकर बड़े होते हैं की लड़का लड़की सामान हैं आश्चर्य है जब वो पहली रात को मिलते हैं तो उनको पता चलता है वह काफी हद तक इक दुसरे से अलग हैं ॥ 

@ आदमी संभवतः एक बार में इक ही कम् करना पसंद करता है जबकि महिला बहोत सारे काम कर लेती हैं 

@ एक महिला को उसके बच्चो के दोस्तों का उसके सपनो का उनके रोमांस का उनके सारे सिक्रेट्स का और वो क्या सैतानिया करते हैं सब पता होता है लेकिन पुरुष केवल यह जनता है की कुछ छोटे बच्चे भी उसके घर में रहते हैं 

दोस्तो मुझे लगता है दोनों को कभी इक दुसरे की बराबरी नहीं करनी चाहिए 

सुखी जीवन के लिए-

" महिला कुछ समझती नहीं इसलिए उससे समझाओ नहीं प्यार दो 
ओर पुरुष कुछ सुनता नहीं इसलिए उसकी सुन लो "
दोनो का जीवन आसान हो जायेगा 

                          अजीत कुमार सिंह (आदेश ) 

नोटे: ये लेखक के अपने विचार है आप इससे सहमत हो जरूरी नहीं 

Saturday, February 18, 2017

नकारात्मक रहिये, सकारात्मक बनिए ! Stay Negative,Be positive

                                             

मेरा दिया हमेशा हवा के विपरीत ही जलता  है अगर मैं ऐसा कहूँ तो  गलत न होगा, उल्टा सोचना थोड़ा मुश्किल है लेकिन ये जरूरी है 

दोस्तों जब भी मैं किसी भी अखबार,पत्रिका,लेख  उपन्यास को पढता हूँ तो हमेशा देखता हूँ उसमें सारी पॉसिटिव बातें होती हैं  हमें काफी उत्साहित कर देंती हैं 
जैसे की 

१ आप कर सकतें !
२ इंसान जो सोच सकता है वो कर सकता है !
३ आप दुनिया मैं कुछ भी कर सकते हो !

 अपने सोचा की क्या यह सम्भव है 

नकारात्मक सोच कैसे आपको सफलता की और  जाएगी आज आपको बताता हूँ 

दोस्तों इक सकारात्मक व्यक्ति ने सोचा की मैं हवा मैं उड़ सकता हूँ और उसने हवाई जहाज का निर्माण किया 

और दूसरी तरफ नकारात्मक व्यक्ति ने सोचा  की अगर उड़ते उड़ते ये हवाई जहाज क्रेश हो गया तो क्या  होगा और इस व्यक्ति ने पैराशूट बनाया 


दोस्तों दोनों ही सोच अपनी जगह सही हैं 

लेकिन सकारात्मकता का जो आतंक आजकल माँ-बाप और कोचिंग संस्थान फैला रहें हैं वह झेलना बहोत ही मुश्किल हो रहा है 



 तुम कर सकते हो 
तुम कुछ भी कर सकते हो 
तुम्हे कोई नहीं रोक सकता 

ये सब तोह ऐसा हो गया है जैसे आजकल हर बच्चा सिकंदर पैदा हो रहा हो और वो विश्व जीतने की होड़ मैं हो 

"मित्रो इक बार इक लड़की का शिष्ट व्यव्हार देखकर उसके अध्यापक ने पुछा  तुम्हे इतना शिष्ट और विनम्र होना किसने सिखाया लड़की ने जवाब दिया किसी ने नहीं हमारे परिवार मैं लोग ऐसा ही व्यव्हार करते हैं" 

दोस्तों ये उदहारण मैंने यहाँ पर इसलिए दिया,क्यूंकि आजकल के माता पिता अपने बच्चो को इतना सकारात्मक करने की कोशिस करते हैं की जिसकी कोई सीमा नहीं है 

जिंदगी में  कामयाबी ही सबकुछ है और तुम्हे कामयाब होना ही है उसके ज़ेहन   में  नाकामयाबी का शब्द आने ही नहीं देते वह कामयाबी शब्द से इतना बंध  चूका होता है की वह कामयाबी के लिए सब कुछ करने को तैयार है

 यू अर बेस्ट ऑफ़ आल 
तुम सबसे  सर्वश्रेस्ट हो और वो यह बात दिल मैं झंडे की तरह गाड़ लेता है 

 कामयाबी चाहिए इससे फर्क नहीं पड़ता की इसके लिए उसने क्या खोया फिर चाहे माँ और बाप ही क्यों न हों 
 कहने का आशय  यह है की उसे जीवन मैं अच्छा इंसान बनाने की और ले जाइये ,सफल वह अपने आप होगा अगर मान लीजिए वह सफल नहीं भी हुआ तो वो आपका सर हमेशा ऊँचा ही रखेगा और आपका प्यारा बेटा या बेटी तो रहेगा ही 


नकारात्मक सुनना जैसे पाप  है  चलिए आपको कुछ  उदहारण देता हूँ 

१ 

इक बार इक अधिकार को उसके उच्च अधिकारियों ने  इक महीने मैं १० कर बेचने को कहा इस पर उसने कहाँ सर मैं इतनी करें नहीं बेच पाउँगा मैं केवल ५ कार हो बेच पाउँगा,

इस पर उसे जमकर डांट पड़ी और उसे नोकरी से निकलने की बात भी कही गई 

लेकिन महीने के अंत मैं इस व्यक्ति ने ५ कारे बेच दी 

२ 

दूसरी तरफ इक दुसरे अधिकारी को को भी यही बात कही गई उसने कहा सर मैं १२ कारे बेच दूंगा 
उसे शाबाशी मिली सब ने तालियां बजाई और कहा ये होता है सकारात्मक नजरिया 

लेकिन मित्रो यह अधिकारी महीने के अंत मैं केवल १ कार बेच पाया 



आप बताइये ऐसी खोखली सकारात्मकता किस काम की थोड़ी सी वाह वाही और प्रशंशा के लिए अपने सामर्थ्य से बाहर जाकर बातें करना क्या सही है?
ऊँचा उड़ना अच्छी बात है क्या हमारे पंख उस उड़ान के लिए मजबूत हैं क्या ये उचाई पर हमरा साथ दे पाएंगे, इस बात पर विचार करना जरूरी है 


मैंने कुछ  IAS सिलेक्टेड बच्चो के इंटरव्यू देखे उन सबने जो बातें कहीं उनमें इक बात बहोत कॉमन थीं 

 कहतें हैं 

"सिलेक्शन के लिए क्या पढ़ना है,इससे ज्यादा ये जानना बहोत जरूरी है की क्या नहीं पढ़ना है"


मित्रो मैं आपको थोड़ा सा नकारात्मक करने की कोशिश करूँगा 

१ आप जहाज के बारे मैं सोचते हैं-  मैं लाइफ जाकेट के बारे मैं सोचता हूँ 

२ आप गाड़ी मैं स्पीड के बारे मैं सोचते हैं- मैं गाड़ी मैं ब्रेक के बारे मैं सोचता हूँ 

३ आप सफलता के बारे मैं सोचते हैं - मैं सोचता हूँ असफल हुए तो फिर क्या ?

सकारात्मकता का मतलब पागलपन नहीं है,पर बिना अपना सामर्थ्य पहचाने, यह आत्महत्या है अपने समय की और पैसे की 

सफलता और आप जो चाहते हैं कहीं न कहीं  नाराकत्मक  सकारात्मक के बीच मैं जो होता है वही है 
किन्तुं दोनों की ही अधिकता हमें डुंबो देती हैं 


बाकि ज्ञान तो Wattsapp पर आपको मिल ही जायेगा  

                                                                अजीत कुमार सिंह (आदेश )
    
                                     चेतावनी :-ये लेखक  के अपने विचार हैं आप इससे सहमत हों ये आवश्यक नहीं 




Wednesday, September 28, 2016

क्या तुम मेरी तमन्ना हो या मुझे तुमसे प्यार है ?

क्या तुम मेरी तमन्ना हो या मुझे तुमसे प्यार है ?
न जाने आजकल उठते क्यों ऐसे सवाल हैं 

फकत बिखरी जिंदगी में जीने की वजह हो तुम 
मेरी जिंदगी सवांर दो जो बेकिनार है 

मशरूफ था मैं अपनी खानाबदोश  जिंदगी में 
मिला हूँ तुमसे तो  मेरे दिल को करार है 
















मुख़्तसर मुलाकातें और बेचैन रातें 
ख्वाब बेसबब जाने क्या शुमार है 

कहने पर पर भला यहाँ कौन यकीं करता है 
फिर भी कहता हूँ ये कि 

मुझे तुमसे प्यार है 
मुझे तुमसे प्यार है 
खुशबू मुझे तुमसे प्यार है.. . . . . . 
                                                                           



 This poetry is specially dedicated to my beloved life partner Khushboo,

 Thanks for covering some beautiful pages in my life     
                                                

                                                                                                         अजीत कुमार सिंह 

Friday, July 29, 2016

सफलता के लिए झूठ बोलना सीखिये........


झूठ सफलता की सीढ़ी 

अगर आप झूठ  कहते है और पकडे जाते हैं इसका मतलब ये नहीं की आप झूठे हैं इसका मतलब ये है की आप सच्चे  हैं और अपको झूट बोलना नहीं आता अपने अभी अभी अभी झूट  बोलना सीखा  है और आप अभी कच्चे हैं 
झूट से अच्छा शिक्षक आज के समय मैं कोई नहीं  अगर आप झूट बोलकर अपना काम करवा लेते हैं तो आपका आत्माविश्वाश और बढ़ जाता है किन्तु सच बोलने  पर आपका काम  होने की सम्भावना ना के बराबर हो जाती है 

जब आप सच कहते हैं है तो आपको कुछ भी याद रखने जरुरत नहीं क्योंकि अपने जो कुछ किया कहा सबकुछ सच था 

किन्तु जब आप झूट का सहारा लेते हैं तोह आपको बहोत सारी  बातें याद रखनी पड़ती है जो अपने पहले कही थी और ये प्रक्रिया आप की सोच और चालाकी को विकसित करती है झूट बोलने पर आपको बहोत सारे बहाने बनाने होते हैं और बहोत झंझटो से गुजरना होता है जैसे घर वालों को झेलना दोस्तों की बातें समाज की बातें इन सब लोगो को सहना काम उम्र में आपको काफी मजबूत करता है और आप बड़े होते होते सारी चालाकियां और होशियारी सीख जायँगे 

झूट बोलने पर बहोत सारी  झंझट और परेशानिया होती हैं जिसको झेलने पर हमारा दिमाक काफी मजबूत और परिपक्व हो जाता है ठीक वैसे ही जैसे हम पुलिस से बहोत डरते हैं लेकिन अगर इक दो बार जेल चले जाएँ उसके बार डर ख़त्म  हो जाता है 

झूट हमें आने वाले जीवन में  और वर्तमान मक्कारी भरे माहौल मैं जीवित रहने की शक्ति  देता है झूट और आत्मविस्वास इक साथ मिल जाएँ तोह सच भी फीका पड़  जाता है सच बोलने वाला काफी हद तक कंफ्यूज हो जाता है और सोचने लगता है की शायद  मैं गलत हूँ जबकि झूट  बोलने वाले को पता है की वह झूट बोल रहा  है तो उसे सोचने का सवाल ही  पैदा नहीं  होता

              


हम जीवन मैं  कितने झूट देखते और पढ़ते हैं और उस पर विश्वास  करते हैं मैं कुछ उदाहरण देता हूँ 



अ ) हम स्कूल जाते हैं हमें यही सिखया  जाता है बेटा  सच बोलो फिर हम कॉलेज जाते हैं वहां पर भी यही बातें लेकिन जब हम जॉब  मैं जातें हैं तो जो भी हमें प्रोडक्ट या सर्विस देनी है उसमें चाहे कोई अच्छी क्वालिटी  हो न हो या खास बात हो न हो हमें झूट बोलकर सीधे सादे  लोगो को बेवखूफ़ बनाना पड़ता है जॉब से ही हमरा घर चलेगा तो फिर किताबों मैं ये सच का ढोंग क्यों बच्चो को पढ़ाया जा रहा है सच बोलने वाले इंसान को झूट बोलना कितना मुश्किल होता है ये तो बेचारा वही  बता सकता है 

ब )लड़के लडकिया झूट बोलकर स्कूल की कक्षा से बंक मारके डेट पर जाते हैं और मजे करते इससे उन्हें झूट बोलने का अनुभव पहले से ही हो जाता है इस तरह जब वो बड़े होकर जॉब  मे  जातें हैं झूट बोलकर आसानी से हॉलिडे एन्जॉय करते हैं जबकि सच बोलने वाला इंसान न ही स्कूल में जीवन के आनंद ले पता है और न ही बड़े होने पर, सच केवल कमजोर लोग ही बोल पाते हैं और अगर मजबूत  भी हैं तो वे अकेले ही हैं जबकी झूट बोलने वाले के साथ लंबी कतार है 

स ) आप बड़ी बड़ी बातें नहीं करते आप शराब  नहीं पीते आप लंबी चौड़ी बातें नहीं करते बातों को बढ़ाचढ़ा कर नहो बोलते सच बोलतें हैं रात रात भर बहार नहीं घुमते पैसा बे फजूल चीजों पर खर्च नहीं करते लोगो से उधर नहीं लेते और लेते भी हैं तो आप लोगो के पैसे समय पर लौटा देते हैं तो यकीन मानिये आप बेवकूफ हैं 
आज के लोगो की नजरो में 

द ) समाज झूट का अदि हो गया है उसे झूठे वादे झूठे दिखावे ही अपनी और आकर्षित करने लगे हैं सच किसी कोने मैं हमेशा से अकेला मूक दर्शक बन कर रह गया है झूठे प्रचार प्रसार और पल भर का आनंद चाहे अपनी इज्जत मान और मर्यादा खो कर ही क्यों न मिले बस चाहिए तोह चाहिए  ही कैसे भी !



इसलिए सच और सच से वास्ता रखने वाले अब केवल हँसी के पात्र बनते जा रहे हैं तो मित्रो आप क्या सोच रहे हैं अब तो मन ही गए होंगे आप की सफलता ही नहीं बल्कि जीवन के हर मोड़ पर 

झूट का सहारा लेकर ही जिंदगी थोड़ी आसान बनाई जा सकती है क्यूंकि सफलता अब  अच्छे इंसान की खूबियों से नहीं उसके बैंक बैलेंस से मापी जाने लगी है 

और सबसे बड़ी बात कोई हमसे झूट बोले तो हमरा दिल भी नहीं टूटता अगर हम खुद झूठे और मक्कार हैं बड़े होने पर किताब की बातें जब गलत लगने लगती हैं तो बहोत दिल टूटता है और खुद को संभ्हाल पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है 

चलो मैं भी झूट बोलने की नाकामयाब  कोशिश करूँगा

नोटः ये लेखक के अपने विचार हैं ये जरूरी नहीं की आप इससे सहमत हो 
                                                                                                   अजीत कुमार सिंह (आदेश )


Sunday, March 27, 2016

जिन पर लोग हसते है वही इतिहास रचते हैं

                      

                                          हँसना  हानिकारक है 

मित्रों बड़ा ही अजीब सा शीर्षक है शायद पहली बार हसी के बारे  मैं  ऐसा किसी ने कहा होगा क्यूंकि हसना हानिकारक कैसे हो  सकता है आज के तनाव भरे जीवन में हसना मुस्कुराना  खिखिलना ,मस्तीभरे तराने 
गाना ये सब जैसे काल्पनिक सा लगता है 

जब हम बच्चों को देखते हैं तोह वो शांत नहीं रहते वो हमेशा  मुस्कुराते मस्ती करते अपने आप  में  मस्त 
उनको देखकर अजीब सी  शांति का  एहसास होता है हसना बहोत अच्छी बात है यही वो चीज है जिसके 
लिए कुछ खर्ज नहीं करना पड़ता बल्कि इसके बदले मैं हमें ही प्रशंशा और इक खुशनुमा माहौल मिलता है 



पर यहाँ तक तोह ठीक है किन्तु हसी हानिकारक क्यों ?

१ मित्रों हम सभी को अपने स्कूल का समय याद होगा कई बार हमारे अध्यापक कक्षा में सवाल पूछते थे  प्रश्न का जवाब  आते हुए भी हम खड़े नहीं होते थे शायद ये अधिकतर लोगो के साथ हुआ होगा पर क्यों कारण  क्या?

२  जब हम किसी पार्टी में जाते हैं  या कोई फंक्शन हो और मौका हो नाचने गाने का   कुछ कर दिखाने का हम 
क्यों पीछे हट जाते हैं क्यों कारण क्या ?

३ जब हम ऑफिस मे नया करने की सोचते हैं तोह  क्यों रुक जाते हैं 
क्यों कारण  क्या ?

४ आप अच्छे से बहोत अच्छे से कोई काम कर सकते हैं फिर भी उसे दूसरों के सामने 
नहीं दिखा पाते क्यों कारण क्या ?

मित्रों सवाल बहोत हैं लेकिन जवाब इक ही है और जवाब इक ही है
दूसरों के हसे जाने का डर 

लोग क्या सोचेंगे ?
क्या मैं गलत हूँ ?
ऐसे ही सैकड़ो प्रश्न 

ये बेतहाशा अकारण हसने वाले लोग हसी को हानिकारक बना देते हैं 
और न जाने कितने लोगो कुछ   कहने से पहले ही चुप करा देते हैं 

हंसी तब जायज है जब उसका महोल हो और इक वाजिब समय हो कोई यक्ति न जाने कितनी हिम्मत जुटाकर स्कूल कॉलेज ऑफिस या मीटिंग मैं कोई सवाल पूछने के लिए खड़ा होता है किन्तु  उसका सवाल सुनकर या सवाल बहोत ही सरल होने पर हम सभी हसने लगते हैं क्या यह उचित है यहीं हमने उसके आत्मविस्वास को नीचे करने की कोशिश की और उसकी भावना को दबने की कोसिश की हो सकता है वह व्यक्ति कुछ नया पूछ रहा हो जो हमें भी नहीं पता हो 

और मजे की बात ये है की इन्ही हसने वालो मैं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हे यह पता नहीं की लोग किस बात पर हस रहे हैं 
मित्रों क्या आप  भी इसी श्रेणी मैं आते हैं अगर हाँ तोह कृपया करके अपने आप  को इस श्रेणी से अलग कर लें 
अकारण हसना इक बीमारी है जो कैंसर से भी ज्यादा ख़तरनाक है जो की न जाने कितनी ही प्रतिभाओं को आत्महत्या करने पर मजबूर कर देती है 

हसी को दवा की तरह लें
 न की दारु की तरह 

                        मैं लोगो द्वारा हँसा जाना पसंद करूँगा 
 बजाय इसके की अपनी कक्षा से कोई भी संदेह अपने घर लेकर जाऊँ 

                                                                               अजीत कुमार सिंह 






Sunday, January 4, 2015

जैसी वो भायी मुझे ,कोई और न मुझे भाए

                                 जैसी वो भायी मुझे ,कोई और न मुझे भाए   


                                             जैसी वो भायी मुझे ,कोई और न मुझे भाए 
                                                              वो मिल जाये तो मेरी जिंदगी संवर  जाये
                                                               आज उसको देखा मैंने कोचिंग की रोड पर
                                                        सीधे हाँथ में मोबाइल और दो इयरिंग्स कान पर
                                                                 कोई उससे कह दे वो काजल भी लगाये
                                                              वो मिल जाये तो मेरी जिंदगी संवर  जाये

मुझे भी संभालना सिखा दो यारो

                                  मुझे  भी संभालना सिखा दो यारो 




                                                            मुझे  भी संभालना सिखा दो यारो 
                                                            कुछ अपने जैसा  ही बना दो यारो
                                                            कैसे पोह्छु  जिस बिलंदी पर तुम हो
                                                           कम  से कम ये सलीका ही सीखा दो यारों