वो रुलाकर हँस न पाया देर तक
जब मैं रोकर मुस्कराया देर तक...........
जब मैं रोकर मुस्कराया देर तक...........
वो रुलाकर हँस न पाया देर तक
जब मैं रोकर मुस्कराया देर
उसकी गली से गुजरा दिल की तसल्ली के लिए
पर आज फिर वो न आया देर तक
भूलना चाह अगर उसको कभी भी
और भी वो याद आया देर तक //
पर आज फिर वो न आया देर तक
भूलना चाह अगर उसको कभी भी
और भी वो याद आया देर तक //
सफ़र में मुश्किले थी पर जुर्रत बढती गई
न बिकने का इरादा था और कीमत बढती गई
किसी ने फूल फल टहनी किसी ने पत्तियां चुन ली
हर इक तूफ़ान पर मेरी साँस थमती गई
सब हँसे मुझको रुलाया देर तक
पर जिसका सहारा था वो न आया देर तक
वो रुलाकर हंस न पाया देर तक
जब मैं रोकर मुस्कुराया देर तक //
न बिकने का इरादा था और कीमत बढती गई
किसी ने फूल फल टहनी किसी ने पत्तियां चुन ली
हर इक तूफ़ान पर मेरी साँस थमती गई
सब हँसे मुझको रुलाया देर तक
पर जिसका सहारा था वो न आया देर तक
वो रुलाकर हंस न पाया देर तक
जब मैं रोकर मुस्कुराया देर तक //
मुझे खुद से मुहब्बत हो गई है
दिल मैं ख़ाली जगह सी हो गई है
तुम्हे पाने की तमन्ना थी मेरी
ये हसरत जाने कहाँ अब खो गई है
तुम याद न आओ कुछ एसी दवा दो
तुम बिन हर रोज दिल को बहलया देर तक
अब अन्सा नहीं लगता जिंदगी का सफ़र
कब तक अकेला चलूगा देर तक
वो रुलाकर हंस न पाया देर तक
जब मैं रोकर मुस्कराया देर तक //
दिल मैं ख़ाली जगह सी हो गई है
तुम्हे पाने की तमन्ना थी मेरी
ये हसरत जाने कहाँ अब खो गई है
तुम याद न आओ कुछ एसी दवा दो
तुम बिन हर रोज दिल को बहलया देर तक
अब अन्सा नहीं लगता जिंदगी का सफ़र
कब तक अकेला चलूगा देर तक
वो रुलाकर हंस न पाया देर तक
जब मैं रोकर मुस्कराया देर तक //
कितना दिल को समझया था
जब तुमने मुझे रुलाया था
मैं तो बस इक पागल ,था
जो तुमको भूल न पाया था
वो रुलाकर चल दिए ,
मैं हंस न पाया देर तक
भूल गया वो इक पल मैं
मैं भूल न पाया देर तक
वो रुलाकर हंस न पाया देर तक
जब मैं रोकर मुस्कराया देर तक //
जब तुमने मुझे रुलाया था
मैं तो बस इक पागल ,था
जो तुमको भूल न पाया था
वो रुलाकर चल दिए ,
मैं हंस न पाया देर तक
भूल गया वो इक पल मैं
मैं भूल न पाया देर तक
वो रुलाकर हंस न पाया देर तक
जब मैं रोकर मुस्कराया देर तक //
अजीत कुमार सिंह


