हँसना हानिकारक है
मित्रों बड़ा ही अजीब सा शीर्षक है शायद पहली बार हसी के बारे मैं ऐसा किसी ने कहा होगा क्यूंकि हसना हानिकारक कैसे हो सकता है आज के तनाव भरे जीवन में हसना मुस्कुराना खिखिलना ,मस्तीभरे तराने
गाना ये सब जैसे काल्पनिक सा लगता है
जब हम बच्चों को देखते हैं तोह वो शांत नहीं रहते वो हमेशा मुस्कुराते मस्ती करते अपने आप में मस्त
उनको देखकर अजीब सी शांति का एहसास होता है हसना बहोत अच्छी बात है यही वो चीज है जिसके
लिए कुछ खर्ज नहीं करना पड़ता बल्कि इसके बदले मैं हमें ही प्रशंशा और इक खुशनुमा माहौल मिलता है
पर यहाँ तक तोह ठीक है किन्तु हसी हानिकारक क्यों ?
१ मित्रों हम सभी को अपने स्कूल का समय याद होगा कई बार हमारे अध्यापक कक्षा में सवाल पूछते थे प्रश्न का जवाब आते हुए भी हम खड़े नहीं होते थे शायद ये अधिकतर लोगो के साथ हुआ होगा पर क्यों कारण क्या?
२ जब हम किसी पार्टी में जाते हैं या कोई फंक्शन हो और मौका हो नाचने गाने का कुछ कर दिखाने का हम
क्यों पीछे हट जाते हैं क्यों कारण क्या ?
३ जब हम ऑफिस मे नया करने की सोचते हैं तोह क्यों रुक जाते हैं
क्यों कारण क्या ?
४ आप अच्छे से बहोत अच्छे से कोई काम कर सकते हैं फिर भी उसे दूसरों के सामने
नहीं दिखा पाते क्यों कारण क्या ?
मित्रों सवाल बहोत हैं लेकिन जवाब इक ही है और जवाब इक ही है
दूसरों के हसे जाने का डर
लोग क्या सोचेंगे ?
क्या मैं गलत हूँ ?
ऐसे ही सैकड़ो प्रश्न
ये बेतहाशा अकारण हसने वाले लोग हसी को हानिकारक बना देते हैं
और न जाने कितने लोगो कुछ कहने से पहले ही चुप करा देते हैं
हंसी तब जायज है जब उसका महोल हो और इक वाजिब समय हो कोई यक्ति न जाने कितनी हिम्मत जुटाकर स्कूल कॉलेज ऑफिस या मीटिंग मैं कोई सवाल पूछने के लिए खड़ा होता है किन्तु उसका सवाल सुनकर या सवाल बहोत ही सरल होने पर हम सभी हसने लगते हैं क्या यह उचित है यहीं हमने उसके आत्मविस्वास को नीचे करने की कोशिश की और उसकी भावना को दबने की कोसिश की हो सकता है वह व्यक्ति कुछ नया पूछ रहा हो जो हमें भी नहीं पता हो
और मजे की बात ये है की इन्ही हसने वालो मैं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हे यह पता नहीं की लोग किस बात पर हस रहे हैं
मित्रों क्या आप भी इसी श्रेणी मैं आते हैं अगर हाँ तोह कृपया करके अपने आप को इस श्रेणी से अलग कर लें
अकारण हसना इक बीमारी है जो कैंसर से भी ज्यादा ख़तरनाक है जो की न जाने कितनी ही प्रतिभाओं को आत्महत्या करने पर मजबूर कर देती है
हसी को दवा की तरह लें
न की दारु की तरह
मैं लोगो द्वारा हँसा जाना पसंद करूँगा
बजाय इसके की अपनी कक्षा से कोई भी संदेह अपने घर लेकर जाऊँ
अजीत कुमार सिंह
