क्या तुम मेरी तमन्ना हो या मुझे तुमसे प्यार है ?
न जाने आजकल उठते क्यों ऐसे सवाल हैं
फकत बिखरी जिंदगी में जीने की वजह हो तुम
मेरी जिंदगी सवांर दो जो बेकिनार है
मशरूफ था मैं अपनी खानाबदोश जिंदगी में
मिला हूँ तुमसे तो मेरे दिल को करार है
मुख़्तसर मुलाकातें और बेचैन रातें
ख्वाब बेसबब जाने क्या शुमार है
कहने पर पर भला यहाँ कौन यकीं करता है
फिर भी कहता हूँ ये कि
मुझे तुमसे प्यार है
मुझे तुमसे प्यार है
खुशबू मुझे तुमसे प्यार है.. . . . . .
This poetry is specially dedicated to my beloved life partner Khushboo,
Thanks for covering some beautiful pages in my life
अजीत कुमार सिंह
न जाने आजकल उठते क्यों ऐसे सवाल हैं
फकत बिखरी जिंदगी में जीने की वजह हो तुम
मेरी जिंदगी सवांर दो जो बेकिनार है
मशरूफ था मैं अपनी खानाबदोश जिंदगी में
मिला हूँ तुमसे तो मेरे दिल को करार है
मुख़्तसर मुलाकातें और बेचैन रातें
ख्वाब बेसबब जाने क्या शुमार है
कहने पर पर भला यहाँ कौन यकीं करता है
फिर भी कहता हूँ ये कि
मुझे तुमसे प्यार है
मुझे तुमसे प्यार है
खुशबू मुझे तुमसे प्यार है.. . . . . .
This poetry is specially dedicated to my beloved life partner Khushboo,
Thanks for covering some beautiful pages in my life
अजीत कुमार सिंह
