झूठ सफलता की सीढ़ी
झूट से अच्छा शिक्षक आज के समय मैं कोई नहीं अगर आप झूट बोलकर अपना काम करवा लेते हैं तो आपका आत्माविश्वाश और बढ़ जाता है किन्तु सच बोलने पर आपका काम होने की सम्भावना ना के बराबर हो जाती है
जब आप सच कहते हैं है तो आपको कुछ भी याद रखने जरुरत नहीं क्योंकि अपने जो कुछ किया कहा सबकुछ सच था
किन्तु जब आप झूट का सहारा लेते हैं तोह आपको बहोत सारी बातें याद रखनी पड़ती है जो अपने पहले कही थी और ये प्रक्रिया आप की सोच और चालाकी को विकसित करती है झूट बोलने पर आपको बहोत सारे बहाने बनाने होते हैं और बहोत झंझटो से गुजरना होता है जैसे घर वालों को झेलना दोस्तों की बातें समाज की बातें इन सब लोगो को सहना काम उम्र में आपको काफी मजबूत करता है और आप बड़े होते होते सारी चालाकियां और होशियारी सीख जायँगे
झूट बोलने पर बहोत सारी झंझट और परेशानिया होती हैं जिसको झेलने पर हमारा दिमाक काफी मजबूत और परिपक्व हो जाता है ठीक वैसे ही जैसे हम पुलिस से बहोत डरते हैं लेकिन अगर इक दो बार जेल चले जाएँ उसके बार डर ख़त्म हो जाता है
झूट हमें आने वाले जीवन में और वर्तमान मक्कारी भरे माहौल मैं जीवित रहने की शक्ति देता है झूट और आत्मविस्वास इक साथ मिल जाएँ तोह सच भी फीका पड़ जाता है सच बोलने वाला काफी हद तक कंफ्यूज हो जाता है और सोचने लगता है की शायद मैं गलत हूँ जबकि झूट बोलने वाले को पता है की वह झूट बोल रहा है तो उसे सोचने का सवाल ही पैदा नहीं होता

हम जीवन मैं कितने झूट देखते और पढ़ते हैं और उस पर विश्वास करते हैं मैं कुछ उदाहरण देता हूँ
अ ) हम स्कूल जाते हैं हमें यही सिखया जाता है बेटा सच बोलो फिर हम कॉलेज जाते हैं वहां पर भी यही बातें लेकिन जब हम जॉब मैं जातें हैं तो जो भी हमें प्रोडक्ट या सर्विस देनी है उसमें चाहे कोई अच्छी क्वालिटी हो न हो या खास बात हो न हो हमें झूट बोलकर सीधे सादे लोगो को बेवखूफ़ बनाना पड़ता है जॉब से ही हमरा घर चलेगा तो फिर किताबों मैं ये सच का ढोंग क्यों बच्चो को पढ़ाया जा रहा है सच बोलने वाले इंसान को झूट बोलना कितना मुश्किल होता है ये तो बेचारा वही बता सकता है
ब )लड़के लडकिया झूट बोलकर स्कूल की कक्षा से बंक मारके डेट पर जाते हैं और मजे करते इससे उन्हें झूट बोलने का अनुभव पहले से ही हो जाता है इस तरह जब वो बड़े होकर जॉब मे जातें हैं झूट बोलकर आसानी से हॉलिडे एन्जॉय करते हैं जबकि सच बोलने वाला इंसान न ही स्कूल में जीवन के आनंद ले पता है और न ही बड़े होने पर, सच केवल कमजोर लोग ही बोल पाते हैं और अगर मजबूत भी हैं तो वे अकेले ही हैं जबकी झूट बोलने वाले के साथ लंबी कतार है
स ) आप बड़ी बड़ी बातें नहीं करते आप शराब नहीं पीते आप लंबी चौड़ी बातें नहीं करते बातों को बढ़ाचढ़ा कर नहो बोलते सच बोलतें हैं रात रात भर बहार नहीं घुमते पैसा बे फजूल चीजों पर खर्च नहीं करते लोगो से उधर नहीं लेते और लेते भी हैं तो आप लोगो के पैसे समय पर लौटा देते हैं तो यकीन मानिये आप बेवकूफ हैं
आज के लोगो की नजरो में
द ) समाज झूट का अदि हो गया है उसे झूठे वादे झूठे दिखावे ही अपनी और आकर्षित करने लगे हैं सच किसी कोने मैं हमेशा से अकेला मूक दर्शक बन कर रह गया है झूठे प्रचार प्रसार और पल भर का आनंद चाहे अपनी इज्जत मान और मर्यादा खो कर ही क्यों न मिले बस चाहिए तोह चाहिए ही कैसे भी !
इसलिए सच और सच से वास्ता रखने वाले अब केवल हँसी के पात्र बनते जा रहे हैं तो मित्रो आप क्या सोच रहे हैं अब तो मन ही गए होंगे आप की सफलता ही नहीं बल्कि जीवन के हर मोड़ पर
झूट का सहारा लेकर ही जिंदगी थोड़ी आसान बनाई जा सकती है क्यूंकि सफलता अब अच्छे इंसान की खूबियों से नहीं उसके बैंक बैलेंस से मापी जाने लगी है
और सबसे बड़ी बात कोई हमसे झूट बोले तो हमरा दिल भी नहीं टूटता अगर हम खुद झूठे और मक्कार हैं बड़े होने पर किताब की बातें जब गलत लगने लगती हैं तो बहोत दिल टूटता है और खुद को संभ्हाल पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है
चलो मैं भी झूट बोलने की नाकामयाब कोशिश करूँगा
नोटः ये लेखक के अपने विचार हैं ये जरूरी नहीं की आप इससे सहमत हो
अजीत कुमार सिंह (आदेश )