मेरा सच,और मेरा झूट
jindgi जाने मुझे क्या सीखाना chahti है
fir उन्ही वीरानो मे मुझे क्यूँ ले जाना चाहती है
बड़ी मुदत से संभाले है ये होश मैंने
वही बेहोशी का मंजर जाने क्यूँ दीखाना चाहती है
हर तुफ्फां ने मुझे अजमाया है
tinke -tinke ने मेरा dil दुखाया है
उम्मीद का दीपक liye firta हूँ इस जहान में
ये हवा तू भी उसे बुझाना चाहती है
jindgi जाने मुझे क्या सीखाना chahti है
fir उन्ही वीरानो मे मुझे क्यूँ ले जाना चाहती है
बरीशे खुशियों की होती है वीरानो में
न जाने क्यूँ में इक बूँद को तरसता हूँ
ये हवा मेरा साथ दे,
मुझ पर भी बरसे कुछ एसी बरसात दे
या बता दे तू भी मुझे े आजमाना चाहती है
jindagi जाने मुझे क्या सीखाना chahti हैfir उन्ही वीरानो मे मुझे क्यूँ ले जाना चाहती है
गुजर रही रही है jindagi मेरे अकेलेपन
भूल रहा हूँ सबकुछ अब मै भोलेपन में
अब मै हस्ता भी हूँ और भी मुस्कुराता हूँ
हर इक मुसकुराहट में अपने गम को छुपाता हूँ
देखता हूँ jindagi तू मुझे कैसे हराती है
jindgi जाने मुझे क्या सीखाना chahti है
fir उन्ही वीरानो मे मुझे क्यूँ ले जाना चाहती है
fir उन्ही वीरानो मे मुझे क्यूँ ले जाना चाहती है
अजीत (तमन्ना ) कुमार singh
jindgi जाने मुझे क्या सीखाना chahti है
fir उन्ही वीरानो मे मुझे क्यूँ ले जाना चाहती है
बड़ी मुदत से संभाले है ये होश मैंने
वही बेहोशी का मंजर जाने क्यूँ दीखाना चाहती है
हर तुफ्फां ने मुझे अजमाया है
tinke -tinke ने मेरा dil दुखाया है
उम्मीद का दीपक liye firta हूँ इस जहान में
ये हवा तू भी उसे बुझाना चाहती है
jindgi जाने मुझे क्या सीखाना chahti है
fir उन्ही वीरानो मे मुझे क्यूँ ले जाना चाहती है
गुजरते वक्त के पन्नो को मैं पलटता हूँ
अकेला हूँ बहुत रो रो के खुद मे ही simat ता हूँबरीशे खुशियों की होती है वीरानो में
न जाने क्यूँ में इक बूँद को तरसता हूँ
ये हवा मेरा साथ दे,
मुझ पर भी बरसे कुछ एसी बरसात दे
या बता दे तू भी मुझे े आजमाना चाहती है
jindagi जाने मुझे क्या सीखाना chahti हैfir उन्ही वीरानो मे मुझे क्यूँ ले जाना चाहती है
गुजर रही रही है jindagi मेरे अकेलेपन
भूल रहा हूँ सबकुछ अब मै भोलेपन में
अब मै हस्ता भी हूँ और भी मुस्कुराता हूँ
हर इक मुसकुराहट में अपने गम को छुपाता हूँ
देखता हूँ jindagi तू मुझे कैसे हराती है
jindgi जाने मुझे क्या सीखाना chahti है
fir उन्ही वीरानो मे मुझे क्यूँ ले जाना चाहती है
fir उन्ही वीरानो मे मुझे क्यूँ ले जाना चाहती है
अजीत (तमन्ना ) कुमार singh
No comments:
Post a Comment