तुम मुझे जान जाते तो ये जानते......
तुम मुझे जान जाते तो ये जानते की
तुम मुझे जान जाते तो ये जानते की
मैं की तुम्हारे बारे मैं क्या सोचता हूँ
आज भी हर शाम अकेले बैठता हूँ
डूबते हुए सूरज की किरणों में
इक उम्मीद खोजता हूँ//
तुम मेरे अकेले पन को जान जाते
तो ये जानते की मैं तुम्हारे बारे में क्या सोचता हूँ //
हर रात खुले आसमान में
चाँद तारों को देखता हूँ //
इसी उम्मीद में की तुम भी उन्हें कहीं से देखते होगे
मेरे बारे में इक बार तो सोचते होगे?
कभी तो नजरे मिलेगी तुमसे बस यही सोचता हूँ
तुम मुझे जान जाते तो ये जानते की
मैं की तुम्हारे बारे मैं क्या सोचता हूँ///
जिस हक़ से तुम मुझे चूमते थे
उसी हक़ से मुझे डांटते तो ये जानते
की मै तुम्हारे बारे में क्या सोचता हूँ //
कभी अकेले बैठकर मेरा दुःख दर्द बांटते
तो ये जानते
की मै तुम्हारे बारे में क्या सोचता हूँ///
खुली किताब हूँ में सबके लिए
पर इसमें क्या लिखा है अगर तुम ये जानते
तो ये जानते
की मै तुम्हारे बारे में क्या सोचता हूँ
तो ये जानते
की मै तुम्हारे बारे में क्या सोचता हूँ//
जिस हक़ से तुम मुझे चूमते थे
उसी हक़ से मुझे डांटते तो ये जानते
की मै तुम्हारे बारे में क्या सोचता हूँ //
कभी अकेले बैठकर मेरा दुःख दर्द बांटते
तो ये जानते
की मै तुम्हारे बारे में क्या सोचता हूँ///
खुली किताब हूँ में सबके लिए
पर इसमें क्या लिखा है अगर तुम ये जानते
तो ये जानते
की मै तुम्हारे बारे में क्या सोचता हूँ
तो ये जानते
की मै तुम्हारे बारे में क्या सोचता हूँ//
तुम्हारा आदेश (अजीत )

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