Tuesday, November 9, 2010

तमन्ना काश तुम मेरे स्कूल में होती...

तमन्ना काश तुम मेरे स्कूल में होती...


तमन्ना काश तुम मेरे स्कूल में होती,
हरदम और हरपल मेरे साथ होती |
तुम रूठ जाती मैं तुमको मनाता,
रूठने मनाने मैं दिन गुजर जाता ||


बस से उतरता, देख तुम्हे खुश हो जाता,
तुमसे नजरे मिलती तो मन ही मन शर्माता |
तुम जहा होती वहा दौड़ कर आता,
पर दिल की बात तुमसे कभी न कह पाता ||


दिल ही दिल में बस ये सोच आती,
तमन्ना काश तुम मेरे स्कूल में होती,
हरदम और हरपल मेरे साथ होती ||


वो principal की  बाते, वो prayer की लाइन,
तुम्हे छुपकर देखना, और कहना you are mine |
हरपल हरदम मैं तुमको चिढ़ाता,
तुम्हे रोता देख, मैं चुप न हो पता |


तुम्हे कोई देखे तो मैं गुस्सा हो जाता,
हर बात पर उससे मैं यूँही झगड़ जाता ||
मेरी परेशानियों में तुम भी दुखी होती,


तमन्ना काश तुम मेरे स्कूल में होती,
हरदम और हरपल मेरे साथ होती |


वो लंच का समय, वो बेडमिन्टन का खेल,
खेल ही खेल में वो दिलो का मेल |
तुम्हारी ख़ुशी के लिए मैं हार जाता,
तुम्हे खुश देखके मैं भी मुस्कुराता |
तुम्हारी छोटी पकड़कर मैं तुमको रुलाता,
तुम्हे रोता देख मैं थोडा सा दर जाता |
दिल के इस पतंग की डोर तुम्हारी होती,


तमन्ना काश तुम मेरे स्कूल में होती,
हरदम और हरपल मेरे साथ होती |


वो छुट्टी का समय, वो बिछड़ने का गम,
दिल तो होता खुश, पर आँखे होती नम |
एक दिन और बिना कुछ कहे गुजर जाता,
काश अजीत तुमको सब कुछ बता पता |
इन्ही सब बातो का गम मुझे सताता,
पर सक्सेस की चाहत में, मैं सब कुछ भूल जाता |


इन रोती आँखों मे तूम सब कुछ पढ़ लेती,
तमन्ना काश तुम मेरे स्कूल में होती,
हरदम और हरपल मेरे साथ होती ||
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       - अजीत  कुमार सिंह

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