Tuesday, November 9, 2010

अजीत की तमन्ना

         अजीत की तमन्ना

मेरी तमन्ना है कि वोही प्यार हो जाये,
school के वोही दो - चार यार हो जायें ||

नहीं अच्छा लगता ये college का दौर मुझे,
नहीं अच्छा लगता ये girlfriend का शोर मुझे |
फिर वोही टिफिन का पराठा आचार हो जाये ||

मेरी तमन्ना है कि वोही प्यार हो जाये,
school के वोही दो - चार यार हो जायें ||

वो बस से जाना और बम्बईया खाना,
वो बैर की गुठली से सबको सताना |
वो शैली का देखना, वो शुभ्रा का चिढ़ाना,
वो दिन याद करके मन ही मन मुस्कुराना ||

प्रकाश की बाते, तमन्ना से दिल लगाना,
सौरभ की सादगी, मयूर का guitar बजाना |
अजय का भोलापन, निधि के नखरे,
sister की बातें, निहारिका की कसमे |
picnic की बस में ये सब एक बार हो जाये ||

मेरी तमन्ना है कि वोही प्यार हो जाये,
school के वोही दो - चार यार हो जायें ||

नहीं अच्छा लगता ये college का दौर मुझे,
हर period अब तो लगता है बोर मुझे |
एक बार फिर class में जमकर शोर हो जाये ||

मेरी तमन्ना है कि वोही प्यार हो जाये,
school के वोही दो - चार यार हो जायें ||

प्रकाश का समझाना, वो शैली से रूठ जाना,
वो parents meeting से मन ही मंब घबराना |
वो पापा का आना, मेरा maths में फेल हो जाना,
पापा को देखकर मेरा मन ही मन शर्माना |
वो दोस्तों का दिलासा, वो शैली की help ,
एक बार फिर उन्ही राहों पर दोस्तों का इंतजार हो जाये

मेरी तमन्ना है कि वोही प्यार हो जाये,
school के वोही दो - चार यार हो जायें ||

नहीं अच्छा लगता ये success का शोर मुझे,
नहीं अच्छी लगती ये पैसों की होड़ मुझे |
बिना किसी शर्त के सब कुछ हार जाऊ,
आज फिर कोई ऐसी बात हो जाये ||

मेरी तमन्ना है कि वोही प्यार हो जाये,
school के वोही दो - चार यार हो जायें ||

वो college के सपने, ज़िन्दगी के नए कदम,
वो विदाई का वक़्त, कुछ ख़ुशी और गम |
चेहरे की मुस्कराहट, और आंखे थी नम,
वो मिलने के वादे, वो बिछड़ने का गम ||

अजीत आज भी वो सब याद करके रोता हैं,
क्या दोस्तों तुम्हे भी ऐसा ही feel होता हैं |

प्रकाश का मुझे देखना, शैली का आंसू छुपाना,
सौरभ का कुछ न कहना, बस दिल तोड़ जाना |
निहारिका के आंसू, शुभ्रा का मुस्कुराना,
वो निधि का इस गम में बेहोश हो जाना |
मेरे कंधे पे हाथ रखके, sister का चुप हो जाना,
ऐसे माहोल में भी मयूर का guitar बजाना ||

कुछ नहीं बदला बस बदल गए हम,
कहाँ थे कहाँ आ गए हम ?
आज फिर दोस्ती का किस्सा आम हो जाये ||

मेरी तमन्ना है कि वोही प्यार हो जाये,
school के वोही दो - चार यार हो जायें ||

इन दोस्तों को याद करके अजीत को आंसू बहाना है,
आँखे बंद करके बस सक्सेस की ओर भागते जाना हैं |
कहाँ मेरी मंजिल, कहाँ उनका ठिकाना है,
कभी मेरी है मज़बूरी, कभी उनका बहाना हैं |
तुम कितना भी आगे चले जाओ मेरे दोस्तों,
अजीत आज भी पुराना है, 
अजीत आज भी पुराना है .
" रुला दिया न यारों ..."
© All rights are reserved.

       - अजीत  कुमार सिंह

1 comment:

Prakash Borse said...

Bhai tu aise hi mehnat karte rehna...
Aur teri poem padhke muze humare school k din yaad aa gaye...
Kya din the yaar.
Tune sabko sajeev kar diya.
.
tumhari ye tamanna hum jaroor puri karenge...
" Picnic ki bus me ye sab ek baar ho jaye...